पत्रकारों पर हमला आतंकवाद से कम नहीं, गिरफ्तार की जानी चाहिए अंटोनिया माइनो अका सोनिया गाँधी


इंदिरा खान/नेहरु/गाँधी, पता नहीं असली नाम क्या था पर उस ज़माने में कांग्रेस की गुंडागर्दी पुरे उफान पर चलती थी, गुंडागर्दी इस स्तर पर पहुँच गयी थी की लोकतंत्र और संविधान की इंदिरा खान/नेहरु/गाँधी ने हत्या कर देश में इमरजेंसी भी लगा दिया था 

पत्रकारों को घरों से उठा लिया जाता था, ऐसे लोगो को जेलों में बंद कर दिया जाता था जो कांग्रेस के खिलाफ बोलने की हिम्मत करते थे, लोगो को यातना दी जाती थी और अनगिनित लोगो को तो गायब ही करवा दिया गया जिनका कभी कुछ पता ही नहीं चला 

कांग्रेस की गुंडागर्दी का वो दौर आज भी कायम है, आज भले ही कांग्रेस सत्ता में नहीं है पर दूसरों को चुप करवाने के लिए उन्हें डरना, हमले करवाना आज भी जारी है 

कांग्रेस की गुंडागर्दी के ताजा शिकार पत्रकार अर्नब गोस्वामी हुए है, उन्होंने सोनिया गाँधी को लेकर सवाल उठाये थे, अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी का उन्होंने इस्तेमाल किया था पर रात को 12 बजकर 15 मिनट पर गुंडे भेजकर उनपर हमला करवा दिया गया, उनकी पत्नी पर भी हमला किया गया, और ये हमला इसलिए ताकि वो अपनी जबान बंद रखे 

कांग्रेस की सरकारें अर्नब गोस्वामी पर केस दर्ज कर रही है और साथ ही साथ कांग्रेस के गुंडे घात लगाकर उनपर हमले कर रहे है

ये वो देश है जहाँ कई सारे कथित पत्रकार प्रधानमंत्री मोदी को दिन रात गालियाँ कई कई सालों से दे रहे है, आजतक उनके खिलाफ कोई कार्यवाही कहीं नहीं हुई पर अर्नब गोस्वामी ने सोनिया गाँधी पर एक बार निशाना क्या साध दिया की उनपर जान लेवा हमला करवा दिया गया 

इन मामलों में सोनिया गाँधी की भूमिका स्पष्ट है, क्यूंकि कांग्रेस में सोनिया गाँधी की मर्जी के बिना कुछ नहीं होता, कांग्रेस ऐसी पार्टी नहीं है जहाँ कोई लोकतंत्र चलता है, यहाँ सिर्फ सोनिया गाँधी और उनके परिवार की मर्जी चलती है

अर्नब गोस्वामी पर जो भी हमला हुआ है वो सोनिया गाँधी के ही इशारे पर हुआ है, ऐसे में सोनिया गाँधी को भी गिरफ्तार किया जाना चाहिए, ताकि देश में स्वतंत्र पत्रकारिता करने वाले लोगों का मनोबल न टूटे, सोनिया गाँधी पर कोई कार्यवाही नही  हुई तो स्वतंत्र पत्रकारिता का मनोबल टूट सकता है जो की लोकतंत्र के लिए बेहद घातक सिद्ध होगा