पालघर या झारखण्ड, दोनों जगह सोनिया की कांग्रेस और मिशनरियों का कनेक्शन


इतना साफ़ हो चूका है की मजहबी उन्मादी और सेक्युलर जमात हिन्दुओ को इन्सान की श्रेणी में नहीं गिनता और इसके 2 सबूत हाल ही में आये है 

पालघर में 3 हिन्दुओ की लिंचिंग की गयी जिसमे 2 हिन्दू साधू थे और एक उनके ड्राईवर, पर सेक्युलर जमात और मजहबी उन्मादियों ने पालघर घटना की निंदा तक नहीं की 

वहीँ दूसरी ओर कल झारखण्ड के जमशेदपुर में एक हिन्दू व्यक्ति पर इसलिए केस दर्ज कर दिया गया क्यूंकि उसने खुद की दूकान पर 'हिन्दू फल दुकान' लिख दिया था, खुद को हिन्दू कह देने मात्र से केस दर्ज कर दिया 

अब इन दोनों घटनाओं में, दोनों स्थानों पर एक चीज कॉमन है और वो है सोनिया गाँधी की कांग्रेस और मिशनरियां 

पालघर हो या झारखण्ड, दोनों जगह धर्मांतरण वाली मिशनरियां बड़े पैमाने पर अपना कुकृत्य लम्बे समय से कर रही है और साथ ही साथ महाराष्ट्र में शिवसेना एनसीपी के साथ साथ सोनिया गाँधी की कांग्रेस सत्ता में है वहीँ झारखण्ड में JMM के साथ कांग्रेस भी गठबंधन वाली सरकार में है 

इतना स्पष्ट हो जाता है की इस देश में हिन्दुओ का चारो ओर दमन हो रहा है, और उन स्थानों पर दमन काफी बड़े स्तर पर हो रहा है जहाँ पर कांग्रेस की सरकार है और इसके एक नहीं बल्कि हजारों उदाहरण है 

पालघर की तरह ही जमशेदपुर की घटना पर भी देश के सेक्युलर जमात ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं करवाई जबकि सेक्युलर जमात अक्सर धार्मिक आज़ादी और मानवाधिकारों की बात करता है, पर कदाचित ये धार्मिक आज़ादी और मानवाधिकार हिन्दुओ के लिए नहीं है