मुसलमानों से सामान लू ? कौन गारंटी देगा उसपर थूक या पेशाब लगा है या नहीं, मैं कहाँ से सामान लूँगा ये मेरी मर्जी है : सुरेश चाव्हानके


देश में सबको स्वतंत्रता है, धार्मिक स्वतंत्रता भी है और किस से सामान लेना है और किस से नहीं लेना है उसके चयन की स्वतंत्रता भी है 

कोई भी किसी पर दबाव नहीं डाल सकता की उसे कहाँ से खरीद करनी है और कहाँ से नहीं, ये हर व्यक्ति की अपनी स्वतंत्रता है, पर इन दिनों सेकुलरिज्म के नाम पर कुछ और ही हो रहा है 

इस देश में लाखों दूकान और ठेले ऐसे है जहाँ इस्लामिक चिन्ह लगे हुआ है, पर उनसे किसी को आपत्ति नहीं हुई, अभी कुछ दिनों में कुछ ठेले और दूकान वालो ने अपने यहाँ भगवा झंडा रखना शुरू कर दिया तो उस से सेक्युलर जमात, मजहबी उन्मादियों और सेक्युलर पुलिस को भी दिक्कत होने लगी, जबकि धार्मिक स्वतंत्रता सबको है 

इस बीच पत्रकार सुरेश चाव्हानके ने भी इस मामले पर अपनी राय रखी, चाव्हानके ने कहा की - मैं सामान कहाँ से लूँगा ये तो मेरी मर्जी है, मैं सामान किस से लूँगा उसका चयन तो सिर्फ मैं ही करूँगा, और इसके लिए तो मुझे क़ानूनी स्वतंत्रता है 

चाव्हानके ने साथ ही ये भी कहा की - मुसलमान से सामान लू तो इसकी गारंटी कौन देगा की उस सामान पर थूक लगा है की नहीं, मुझे जहाँ से अच्छा लगेगा मैं वहां से खरीद करूँगा

आपको फिर बता दें की कानून के मुताबिक सबको धार्मिक आज़ादी है, कौन अपनी दूकान, अपनी संपत्ति, अपने ठेले पर कौन सा धार्मिक प्रतिक लगाता है ये उसकी स्वयं की इक्षा है, साथ ही साथ ग्राहकी के लिए भी सबको पूरी स्वतंत्रता है, अगर इस देश में 'मुस्लिम ढाबे' सही है तो फिर 'हिन्दू फल दूकान' भी उतना ही सही है