भारतीय सेना के सीमा पर पहुँचते ही जिनपिंग ने कहा - "हमारी इंडिया से कोई दुश्मनी नहीं, बातचीत ही समस्या का समाधान"



कहते है की फट के फ्लाई ओवर हो जाना, चीन के साथ भी ऐसा ही हुआ है, चीन की सारी हेकड़ी निकल गयी है और अब वो युद्ध छोड़कर बातचीत पर उतर आया है 

पिछले कई दिनों से चीन भारत पर दबाव बनाने के लिए सीमा पर विवाद उत्पन्न कर रहा था और भारत डर जाये इसके लिए चीन ने पहले सिक्किम फिर लद्दाख सीमा पर सेना की तैनाती शुरू कर दी 

चीन ने लद्दाख सीमा पर 7 हज़ार की सेना और 20 लड़ाकू विमान तैनात कर दिए और सोचा की भारत डर जायेगा और वो न ही विदेशी कंपनियों को अपने यहाँ बुलाएगा और न ही चीनी सीमा तक रोड कंस्ट्रक्शन का काम करेगा 

पर चीन भूल गया की ये 1962 वाले नेहरु और उसके रक्षामंत्री कृष्णा मेनन का भारत नहीं बल्कि 2020 का मोदी का भारत है 

मोदी सरकार ने रोड कंस्ट्रक्शन के काम को बंद करने की जगह और तेजी से करने का आदेश दे दिया और साथ ही लद्दाख की सीमा पर चीन के बराबर ही सेना और लड़ाकू विमान तैनात कर दिए 

भारत ने ऐलान कर दिया की चीन की किसी भी हिमाकत का जवाब दिया जायेगा और एक गोली चली तो यहाँ से भी गोली का जवाब गोले से दिया जायेगा

चीन भारत को डराने के मकसद से अपनी सेना दिखा रहा था पर यहाँ दाव उल्टा पड़ गया और भारत ने भी अपनी सेना को भेज दी, अब इसके बाद भारत में चीनी राजदूत ने कल कहा की - चीन युद्ध नहीं चाहता और हर विवाद का समाधान तो सिर्फ बातचीत से ही निकल सकता है 

इसके बाद अब खुद चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग का भी बयान सामने आया है और जिनपिंग ने कहा है की - चीन एक शांतिप्रिय देश है और वो युद्ध नहीं चाहता, इंडिया हमारा एक मित्र देश है और हम युद्ध नहीं चाहते, बातचीत से ही समस्या का समाधान निकाला जाना चाहिए 


चीन ने भारत के सामने घुटने टेक दिए और युद्ध छोड़कर अब बातचीत करने में लग गया है, वहीँ भारत ने फिर एक बार साबित कर दिया की ये अब नेहरु, मनमोहन वाला नहीं बल्कि मोदी वाला भारत है