ठेलों, दुकानों पर भगवा झंडा पूरी तरह क़ानूनी और संविधानिक, भगवे झंडे पर FIR पूरी तरह गैरकानूनी और गुंडई



धार्मिक स्वतंत्रता संविधान से प्राप्त है, इस के तहत देश के हर नागरिक को चाहे कोई भी राज्य हो उसे अपने मन के मुताबिक धार्मिक चिन्ह, धार्मिक प्रतिक चुनने का अधिकार है, और हर नागरिक की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना पुलिस और प्रशासन की ही ड्यूटी है 

अगर कोई शख्स अपने ठेले पर भगवा झंडा लगाकर अपना कारोबार कर रहा है, कोई शख्स दूकान पर भगवा झंडा लगाकर अपना कारोबार कर रहा है तो उसके खिलाफ कोई क़ानूनी कार्यवाही नहीं बनती, अगर उसके खिलाफ राजनातिक कारणों से कोई भी केस या FIR किया जाता है तो वो FIR और केस पूरी तरह गैरकानूनी है और ऐसे गैरकानूनी FIR लिखने पर सम्बंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ ही केस चल सकता है 

भगवा झंडा लगाना किसी भी व्यक्ति का मूल अधिकार है, ये उसका मानवाधिकार है, ये उसका धार्मिक अधिकार है, और अगर भगवे झंडे को कोई हटाता है या FIR लिखता है तो फिर वो भगवा झंडा लगाने वाले के धार्मिक भावना को आहात कर रहा है और ऐसे शख्स के खिलाफ, पुलिस अधिकारी के ही खिलाफ FIR और केस बनता है 

भगवा झंडा ठेले या दूकान पर लगाने से किसी की भी धार्मिक भावना आहात नहीं होती, और कोई भी FIR पूरी तरह गैर क़ानूनी है 

पिछले कुछ समय से तेलंगाना, झारखण्ड, बिहार जैसे राज्य में ठेले और दुकानों पर भगवा झंडा लगाने से पुलिस द्वारा कार्यवाही भी की गयी है और FIR भी दर्ज किये गए है, ये सभी FIR और सभी कार्यवाही पूरी तरह गैरकानूनी और गैर संविधानिक है साथ ही साथ ये गुंडागर्दी भी है, और जो भी पुलिस इस तरह के गैर क़ानूनी कार्य को कर रही है उसके खिलाफ कोर्ट में शिकायत की जा सकती है

धार्मिक चिन्ह जैसे की भगवा झंडा या भगवान की फोटो या मूर्ति अपने ठेले और दूकान पर लगाना पूरी तरह व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता है जो की सीधे संविधान से प्राप्त है और कोई भी इस धार्मिक स्वतंत्रता को रोक नहीं सकता