अपने माँ-बाप की अकेली संतान है 95% चीनी सैनिक, होते है बेहद डरपोक, चीन को रौंदकर हराना बहुत आसान


पहले आपको साफ़ कर दें की चीन ने आज़ादी के बाद आजतक सिर्फ 1 ही युद्ध जीता और वो युद्ध था 1962 का युद्ध और वो युद्ध भी चीन ने नेहरू की मदद से जीता, नेहरू ने वायु सेना का इस्तेमाल नहीं किया, युद्ध से सालों पहले ही हथियारों के कल कारखाने बंद कर दिए और भारत को हरवा दिया, इस युद्ध के अलावा चीन ने आजतक 1 भी युद्ध नहीं जीता 

चीन वियतनाम में 1979 से बुरी तरह हार चूका है, इसके अलावा चीन आजतक ताइवान का कुछ नहीं बिगाड़ सका है और ये दोनों ही देश चीन से बेहद छोटे है, इन देशों ने चीन के खिलाफ पूरी मजबूती से लड़ाई लड़ी है इसी कारण चीन दोनों से पिट चूका है 

1962 के बाद 1967 में भी चीन-भारत युद्ध हुआ था, पर उस समय नेहरू प्रधानमंत्री नहीं था और नतीजा ये था की चीन के सैंकड़ो सैनिको को जब भारतीय सेना ने मौत के घात उतार दिया तो चीन ने सफ़ेद झंडा लहरा दिया और हार मानकर चीनी सेना भाग खड़ी हुई 

1967 में भारतीय सेना को पूरी आज़ादी दी गयी थी और भारतीय सेना ने चीनी सेना के साथ जो किया, उसका नतीजा ये है की आजतक चीनी सेना ने भारत की तरफ 1 भी गोली खुद चलाने की हिम्मत नहीं की, चीन पाकिस्तान को फंडिंग करता है और पाकिस्तान के जरिये भारत से लड़ता है, पर खुद भारत से लड़ने की हिम्मत चीन में बिलकुल नहीं और इसका कारण भी है 

दरअसल आज की जो मौजूदा चीनी सेना है उसमे 95% से ज्यादा सैनिक अपने माँ-बाप की एकलौती संतान है, चीन में 1 दंपत्ति 1 संतान का कानून बना था, आज चीन के अधिकतर लोग अपने माता पिता के एकलौते ही बच्चे है 

जिनपिंग की भी 1 ही बेटी है जिसका नाम मिंगजी है, चीनी सैनिक अपने माँ बाप के एकलौते बच्चे है, इनपर परिवार का, माँ बाप का बहुत दबाव होता है, इनको बड़े नाजो से पाला गया है, अगर ये चले जाये तो इनके माँ बाप अकेले हो जायेंगे, चाहे चीन कितना भी वामपंथी हो पर बच्चे और माँ बाप में लगाव आज भी वैसा ही है 

जिनपिंग कितना भी आतंकवादी ह्रदय का हो पर उसकी पुरानी तस्वीर देखिये, वो अपनी बेटी के साथ 


चीनी सेना वियतनाम और ताइवान का भी कुछ नहीं बिगाड़ सकी जबकि ये दोनों काफी छोटे देश है, चीनी सेना सिर्फ अपने हथियार लहरा सकती है, सिर्फ परेड कर सकती है पर ये सेना युद्ध बिलकुल नहीं कर सकती

पिछले 50 साल में चीनी सेना ने किसी पर 1 गोली तक नहीं चलाई है, चीनी सेना को युद्ध का कोई अनुभव नहीं है, क्यूंकि चीनी सैनिक जो अपने माता पिता के एकलौते बच्चे होते है वो युद्ध कर ही नहीं सकते, चीनी सेना सिर्फ हथियार ही दिखा सकती है, पर लड़ाई नहीं लड़ सकती, क्यूंकि हथियार लड़ाई नहीं लड़ते, सैनिक लड़ाई लड़ते है और चीनी सेना के सैनिक पेपर टाइगर है, कागज़ के शेर, इसी कारण चीन की सेना किसी से भी युद्ध लड़ती ही नहीं और अगर कोई मजबूत देश चाहे तो बड़ी ही आसानी से चीन को रौंद सकता है 

जबकि भारत और भारतीय सेना का ये हाल है की अगर यहाँ प्रधानमंत्री 1 आवाहन ही कर दें तो लाखों करोडो युवा बॉर्डर पर जाने के लिए 24 घंटे तैयार रहते है, चीन भी इस बात  को समझता है इसी कारण वो भारत से खुद नहीं लड़ता बल्कि पाकिस्तान को फंडिंग करता है ताकि भारत से लड़े तो पाकिस्तानी ही लड़े, चीनी सैनिक लड़ नहीं सकते