अपनी सगी बेटी जहाँआरा पर चढ़ गया शाहजहाँ, फिर बोला - बेटी से सम्भोग बिलकुल जायज, ये हक़ है मेरा


वामपंथी इतिहासकारों की लिखी हुई किताबों में अक्सर शाहजहाँ को एक प्रेमी के रूप में दिखाया जाता है, पर ये सब सिर्फ कोरे झूठ के अलावा कुछ नहीं है 

असल में शाहजहाँ एक आतंकवादी के साथ साथ बलात्कारी भी था और सिर्फ दूसरी औरतों की ही नहीं बल्कि अपनी ही सगी बेटियों का बलात्कार करता था और इसे जायज भी ठहरता था 

वामपंथी इतिहास की किताबों में बताया जाता है की शाहजहाँ तो इतना बड़ा प्रेमी था की उसने अपनी पत्नी मुमताज़ महल के लिए ताजमहल तक बनवाया था

अब आपको जो चीजें नहीं बताई जाती उनपर भी गौर कीजिये 

* मुमताज़ शाहजहाँ से पहले किसी और मुग़ल सैनिक की बीवी थी, शाहजहाँ ने उसे पाने के लिए उसके शौहर को मरवा दिया 

* मुमताज़ महल की मौत 38 साल की उम्र में ही हो गयी, इतनी कम उम्र में मौत किसी बीमारी या एक्सीडेंट से नहीं हुई, मुमताज़ महल शाहजहाँ की 14वी औलाद पैदा करते हुए कमजोरी से मर गयी, शाहजहाँ ने उसे बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं बल्कि फैक्ट्री ही बनाया हुआ था

* मुमताज़ महल की मौत के सिर्फ 7 दिनों  बाद शाहजहाँ ने जहरन उसकी बहन फरजाना से निकाह कर लिया 

अब आपको एक अहम् चीज और जननी चाहिए, शाहजहाँ और मुमताज़ महल की जो पहली औलाद थी वो एक बेटी थी जिसका नाम जहाँआरा था, जहाँआरा अपनी माँ मुमताज़ महल की तरह ही दिखती थी 

यूरोपियन इतिहासकार फ़्रन्कोइस बेर्निएर ने लिखा है की - शाहजहाँ ने अपनी बेटी जहाँआरा का कहीं भी निकाह नहीं होने दिया, वो खुद ही अपनी बेटी से सम्भोग करता था, शाहजहाँ अपनी बेटी से सम्भोग के लिए इतना पागल हो जाता था की सबके सामने ही जहाँआरा को कमरे में जाने को कहता था 

फ़्रन्कोइस बेर्निएर लिखते है की शाहजहाँ जहाँआरा से लगभग रोज ही सम्भोग करता था, पहले तो सिर्फ महल में ये बातें चलती थी पर फिर महल के बाहर भी ये बात जाने लगी की शाहजहाँ अपनी ही बेटी से सम्भोग कर रहा है 

इसपर चर्चा शुरू हुई तो शाहजहाँ ने अपने पक्ष में कहा की - माली को बाग़ के फल खाने का पूरा हक़ है, यानि जहाँआरा तो मैंने ही जन्म दिया है और अब उसपर मेरा ही हक़ है 

इतना ही नहीं जहाँआरा के किसी भी आशिक को वह उसके पास फटकने नहीं देता था। कहा जाता है की एकबार जहाँआरा जब अपने एक आशिक के साथ इश्क लड़ा रही थी तो शाहजहाँ आ गया जिससे डरकर वह हरम के तंदूर में छिप गया, शाहजहाँ ने तंदूर में आग लगवा दी और उसे जिन्दा जला दिया। दरअसल अकबर ने यह नियम बना दिया था कि मुगलिया खानदान की बेटियों की शादी नहीं होगी। इतिहासकार इसके लिए कई कारण बताते हैं। इसका परिणाम यह होता था कि मुग़ल खानदान की लड़कियां अपने जिस्मानी भूख मिटाने के लिए अवैध तरीके से दरबारी, नौकर के साथ साथ, रिश्तेदार यहाँ तक की सगे सम्बन्धियों का भी सहारा लेती थी।

शाहजहाँ की मृत्यु आगरे के किले में ही 22 जनवरी 1666 ईस्वी में 74 साल की उम्र में आगरे के किले में हुई। ‘द हिस्ट्री चैनल’ के अनुसार अत्यधिक कमोत्तेजक दवाएँ खा लेने का कारण उसकी मौत हुई थी। यानी जिन्दगी के आखिरी वक्त तक वो अय्याशी ही करता रहा था।अब आप खुद ही सोचें कि क्यों ऐसे बदचलन और दुश्चरित्र इंसान को प्यार की निशानी समझा कर महान बताया जाता है।