मुंबई पुलिस की निंदा करने वाली कंगना हरामखोर ? तो भारत को गाली देने वाले ये हरामखोर क्यों नहीं ?


इस देश में महिलावादी, सेकुलरवादी, बुद्धिजीवी आये दिन भारतीय सेना को गाली देते है, हिन्दुओ को तो गाली देते ही है ये भारत देश को भी गाली देते है 

आमिर खान एक बार कह रहा था की - मुझे तो अब इस देश में डर लगता है, मुझे मेरे बच्चो की फिकर होने लगी है और मेरी बेगम तो ये कहती है की कहीं और बस जाते है 

नसीरुद्दीन शाह भी कह रहा था की - अब भारत में खतरा बढ़ गया है, अब यहाँ रहना मुश्किल हो चूका है, और अब यहाँ डर लगता है

शाहरुख़ खान भी कह रहा था की - अब इस देश में बोलने की आज़ादी ख़त्म हो चुकी है और हमे यहाँ डर लगता है 

इसके अलावा हामिद अंसारी जो की भारत का उपराष्ट्रपति हुआ करता था उसने भी कहा था की - भारत में मुसलमानों  के लिए रहना सुरक्षित नहीं है 

इन सभी ने सीधे भारत को गाली दी थी, मूल रूप से ये हिन्दुओ को गाली दे रहे थे और कह रहे थे की हिन्दू अब भारत के अन्दर इन्हें जीने नहीं दे रहे और इनको डर लग रहा है 

सभी तरह के सेक्युलर बुद्धिजीवियों ने इन सबका समर्थन किया था और इनकी बात को अभिव्यक्ति की आज़ादी घोषित कर दिया था 

कंगना रानौत ने तो न ही भारत को कभी गाली दी और न ही मुंबई शहर या महाराष्ट्र राज्य को, कंगना रानौत ने तो मुंबई पुलिस की निंदा की थी, कंगना रानौत ने महाराष्ट्र सरकार की निंदा की थी, मुंबई पुलिस मुंबई शहर नहीं है और न ही महाराष्ट्र सरकार महाराष्ट्र राज्य है 

इसके बाबजूद कंगना रानौत को हरामखोर कह दिया गया, और बुद्धिजीवियों ने तो उल्टा संजय राउत का ही समर्थन कर दिया और कह दिया की "हरामखोर कोई गाली नहीं होती" 

यहाँ मुख्य चीज ये है की मुंबई पुलिस की निंदा करने से कंगना रानौत हरामखोर हो जाती है तो फिर भारत को खतरनाक, असुरक्षित देश बोलने वाले आमिर खान, शाहरुख़ खान, नसीरुद्दीन शाह, हामिद अंसारी हरामखोर क्यों नहीं है