खुद हारा, बीवी हारी अब बेटा भी हार गया, कहीं का नहीं रहा शत्रुघ्न सिन्हा, बीजेपी छोड़ने के बाद बन गया धोबी का कुत्ता


ये कोई गाली नहीं बल्कि एक प्रसिद्द कहावत है, "धोबी का कुत्ता, न घर का न घाट का" और अब शत्रुघ्न सिन्हा की ये ही स्तिथि हो चुकी है 

शत्रुघ्न सिन्हा बीजेपी का नेता हुआ करता था, ये अटल सरकार के दौरान भी सांसद था और 2014 में भी ये सांसद बना जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने 

इसे मंत्री नहीं बनाया गया तो धीरे धीरे अपनी ही पार्टी को कोसने लगा और 2019 का चुनाव आते आते ये कांग्रेस में चला गया 

ये बीजेपी के टिकेट पर बिहार की पटना सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा करता था, बीजेपी के टिकेट पर इसे एक के बाद एक जीत मिली थी और ये लाखों वोटों से चुनाव जीता था 

इसे इस बात का घमंड हो चूका था की ये अपने बल पर चुनाव जीतता है और ये एक बड़ा नेता है, साल 2019 के चुनाव मे कांग्रेस के टिकेट पर पटना की ही सीट से चुनाव लड़ा पर इसकी गलतफहमी दूर हो गयी और ये बीजेपी के रविशंकर प्रसाद से बुरी तरह हार गया 

खुद ये कांग्रेस के टिकेट पर पटना से लड़ा और साथ ही लखनऊ की सीट पर इसने अपनी बीवी को समाजवादी पार्टी के टिकेट पर लडवाया, पर शत्रुघ्न सिन्हा तो हारा ही, इसकी बीवी भी लखनऊ में लाखों वोटों के अंतर से हार गया 

इसके बाद अब बिहार में चुनाव हुआ तो इसने कांग्रेस से कहकर अपने बेटे लव सिन्हा को पटना की ही बांकीपुर सीट से टिकेट दिलवा दिया और अब इस सीट पर भी नतीजा आ गया 

माँ बाप की तरह लव सिन्हा भी बुरी तरह चुनाव हार गया, इसे बांकीपुर सीट पर बीजेपी के नितिन नबीन ने 30 हज़ार से भी ज्यादा वोटों से हरा दिया 

पहले खुद शत्रुघ्न सिन्हा चुनाव हारा, फिर बीवी भी हारी और अब बेटा भी हार गया, बीजेपी से जाने के बाद से ही शत्रुघ्न सिन्हा धोबी का कुत्ता बन चूका है, न घर का रहा है और न ही घाट का